President's Message

 

जातिवाद, साम्प्रदायिकता, आतंकवाद, सामाजिक असमानता, महंगाई, भ्रष्टाचार, हिंसा का ग्राफ क्यों बढ़ता जा रहा है? युवाओं के सामने रोजगार का संकट क्यों है? महिलाओं के शोषण की घटनाएं क्यों बढ़ रही है? स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार जैसी बुनियादी जरूरतों से आमजन क्यों वंचित है?आज भी देश के लगभग 70 फसदी लोगों को 20 से 40 रू. की दिहाड़ी पर गुजारा करना पड़ रहा है।जब देशवासियों का वर्तमान और भविष्य ही उज्जवल नहीं तो देश कैसे उन्नति कर सकता है और जो भी उन्नति हुई भी है वह एक विशेष वर्ग तक ही सीमित रह गई हैं।

आज देश में अमीर और अमीर, गरीब और गरीब होता जा रहा है।आजादी के इन 65 सालों के बाद भी हर पेट को रोटी और हर हाथ को काम, सबको शिक्षा अच्छा स्वास्थ्य से हम अब भी कोसो दूर है ,जिनके पास पैसा है या पैसे पर नियंत्रण है आज वह इस व्यवस्था में सब प्राप्त कर सकते हैं।
देश में कानून और न्याय की मौजूदा स्थितियां बेहद चिंताजनक है। आम जन को कितनी सुगमता से न्याय मिलता है ये किसी से छुपा नहीं है ।
खेलने और पढ़ने के उम्र में जिन्दगी का बोझ ढो रहे है , देश के कल कारखाने बंद हो रहे है, लघु उद्योग कुटीर उद्योग अपना अस्तित्व खोते चुके हैं।
विदेशी कर्ज के बावजूद  देश को उन्नति की ओर बताया जा रहा है।
हम कैसा देश देना चाहते हैं,अपनी भावी पीढ़ी को ?
जहाँ हर तरफ भ्रष्टाचार का बोलबाला हो ?
जहाँ मजहब इंसान को सुधरने के बजाय मरने मारने के काम आये ?
जहाँ इंसान का इंसानियत से कोई मतलब न हो ?
जहाँ हिंसा स्वार्थपरता अवसरवादिता को बोल बाला ?
जहाँ  नारी का माता/पिता व बड़ों एवं गुरूजनों का अपमान हो ?
जहाँ स्नेह, त्याग, बलिदान, समर्पण, सहयोग, सहानुभूति सेवाभाव, कर्तव्यपरायणता, भरोसा जैसे शब्द बेमानी हो ?
हम कौन सी संस्कृति, संस्कार और विरासत देने चाहते हैं अपनी भावी पीढ़ी को ?
ऐसा बिल्कुल नहीं कि मैंने अब तक जो भी बाते लिखी हैं इससे आप अंजान है।क्योंकि इसलिए अखबार, पत्रिकाएं, रेडियों, न्यूज चैनल पर्याप्त है।
हम और आप सब जानते है, लेकिन कुछ  इसलिए नहीं करते हैं क्यूंकि 
 हमें क्या फायदा? हम क्यों करें? जैसे सवाल  में हम उलझे रहते है ।
हम यह भी सोचते हैं कि देश की समस्याओं और हमारी समस्याओं के निदान के लिए देश के नेता तो हैं। वह हमारी समस्याओं से निजात दिलायेंगे। इसलिए आजादी से अब तक हम तमाम चुनावों में अनेको प्रयोग कर चुके हैं और हर दल की सरकार बनवा कर देख चुके हैं।
समस्याएं कम होने की बढ़ती गई। ऐसा नई है कि राजनीतिक दल आपके लिए संघर्ष नहीं करते है,
लेकिन उनका संघर्ष और आन्दोलन तो केवल जनसमर्थन बचाये रखने के लिए होता है
हमारे सामने चुनौती है कि हम अपने भविष्य के साथ हो रही सौदेबाजी के खिलाफ संघर्ष खड़ा करे एक ऐसा समाज का निर्माण करना है जिसमें नागरिक अपने देश के प्रति संवेदनशील और जिम्मेदार हो ।
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